Social Media Addiction: सोशल बनिए लेकिन अपनों की कीमत पर नहीं

जिन युवाओं ने Social Media पर संत गुरमीत राम रहीम जैसी शख्सियत को अपना Role Model बना रखा है, कम से कम वो युवा Social Media पर अश्लीलता, नशाखोरी को तो बढ़ावा नहीं देते, ये तय है। लेकिन इस सिलसिले को आगे बढ़ाना होगा। या यूं कहें कि इसे एक अभियान की शक्ल देनी होगी

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अखबार में एक खबर ने दिलो-दिमाग को झकझोर सा दिया। पति-पत्नी और वो की कहावत में ‘वो’ की जगह सोशल मीडिया लेता जा रहा है। हैरत तो तब हुई जब पढ़ा कि इन दिनों घरेलु हिंसा के हर पांचवे विवाद की जड़ सोशल मीडिया बनता जा रहा है। Social Media Addiction सोशल बनिए लेकिन अपनों की कीमत पर नहीं, Facebook , Twitter addictionसोशल मीडिया की उत्पत्ति हुई थी दूर बैठे अपनों को साथ जोडऩे के लिए, और अब हालात इस कदर हो चुके हैं कि साथ वाली कुर्सी पर बैठा शख्स ही याद नहीं रहता। एक ही घर में रहने वाले आपस में कई कई घंटों तक कोई बात नहीं करते, अलबत्ता एक दूसरे की फेसबुक पोस्ट को जरूर लाइक करते हैं। इतना ही नहीं, सोशल मीडिया की पहुंच के कारण अश्लीलता हरेक उस हिस्से में भी पहुंच रही है जहां उसका जाना प्रतिबंधित माना जाता था। यहां मैं बात कर रही हूं बच्चों की। स्मार्टफोन हाथ में हों तो उनको अश्लील फिल्में और कहानियों के लिए कहीं बाहर जाने की जरूरत ही नहीं है। यूनिवर्सिटी ऑफ मांट्रियल की एक ताजा रिसर्च की मानें तो फेसबुक पर ३०० से अधिक दोस्त बनने के बाद किशोरों में तनाव ज्यादा देखा गया है। इतना ही नहीं, कई मामलों में तो तनाव का स्तर जानलेवा तक हो सकता है। हैरानी इस बात की है कि बावजूद इसके किशोरों को सोशल मीडिया का इस्तेमाल धड़ल्ले से करने की इजाजत लगातार दी जाती रही है। बजाए उनके भविष्य के बारे में कुछ भी सोचे।

Social Media Addiction: सोशल बनिए लेकिन अपनों की कीमत पर नहीं

सोशल मीडिया के साथ कनेक्ट रहना आपकी मर्जी के ऊपर निर्भर होना चाहिए। ऐसा ना हो कि आप Social Media Addict हो जाएं। ऐसा हुआ तो हर वक्त सिर्फ स्टेटस चेक करने पर ही ध्यान जाएगा, किसने लाइक किया और किसने नहीं लाइक किया। जिसने लाइक नहीं किया, उसने लाइक क्यों नहीं किया और लाइक किया तो कमेंट क्यों नहीं किया। इन बेवजह के सवालों में जिंदगी धीरे-धीरे खोखली होती जाएगी। इससे अच्छा है कि समय रहते संभलें। इसके लिए सबसे अच्छा उपाय हो सकता है ‘ऑनलाइन उपवास’ । शरीर की स्थिति स्वस्थ रखने के लिए उपवास के बारे में आपने अवश्य सुना होगा, उसी तरह मन को शांत और स्थिर रखने के लिए ‘ऑनलाइन उपवास’ को अपनाया जा सकता है। इस उपवास में नेट का प्रयोग वर्जित रहेगा। ना फेसबुक और ना ही व्हाट्सअप । इससे फायदा ये होगा कि सोशल मीडिया के ऊपर आपकी निर्भरता धीरे-धीरे कम होती जाएगी। खुद को सोशल मीडिया के जाल से बचाने का ये सबसे बेहतरीन उपाय है।

बाबा राम रहीम सिखा रहे Social Media का सही इस्तेमाल

देश के लगभग सभी प्रमुख महानगरों में सफाई अभियान चलाने के बाद डेरा सच्चा सौदा के संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसा Social Media को भी जैसे शुद्ध करने के अभियान में जुट गए हैं। Twitter पर उनके लाखों फालोवर हैं जो मानवता भलाई से जुड़े उनके Tweets को तुरंत ReTweet और Reply करते हैं। Saint Ram Rahim on Twitter, lionheart MSG warriorआप सोच रहे होंगे कि इसमें हैरत की क्या बात है, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि संत राम रहीम के Tweets से जुड़े अधिकतर Hashtag मानवता भलाई के कार्यों से सम्बंधित होते हैं। रक्तदान, पौधारोपण, देश को स्वच्छ रखने की प्रेरणा, गरीब व जरूरतमंद लोगों की सहायता करने का सन्देश, बेटियों को बेटों के बराबर दर्जा देने जैसे प्रेरणादायक संदेशों की फेरहिस्त बहुत लम्बी है जो संत राम रहीम के Tweets में समाहित रहते हैं। गुरूजी ने रूहानियत, Technology और मनोरंजन का ऐसा ताना-बाना बुना है जिस पर मोहित होकर युवा-वर्ग अध्यात्म और नैतिकता की तरफ खिंचा चला आता है। संत राम रहीम की अगली फिल्म MSG Online Gurukul भी कुछ ऐसी ही Theme पर आधारित बताई जा रही है। इतने बड़े संत के साथ सोशल मीडिया पर जुडऩे वाले युवाओं की सोच में सकारात्मक बदलाव आता महसूस किया गया है। जिन युवाओं ने Social Media पर संत गुरमीत राम रहीम जैसी शख्सियत को अपना Role Model बना रखा है, कम से कम वो युवा Social Media पर अश्लीलता, नशाखोरी को तो बढ़ावा नहीं देते, ये तय है। लेकिन इस सिलसिले को आगे बढ़ाना होगा। या यूं कहें कि इसे एक अभियान की शक्ल देनी होगी। तभी Social Media घरों को तोडऩे जैसे कलंक से खुद को आजाद करवा सकेगा।

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