मात्र एक रुपए में बिक रही है आपकी निजी जानकारी

यदि आप अपनी निजता को लेकर बेहद संजीदा हैं तो यह आपके लिए एक चौंकाने वाली खबर है, जानें कैसे Data Broker कम्पनियां बेच रहीं है आपका निजी डाटा

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यदि आप अपनी निजता को लेकर बेहद संजीदा हैं तो यह आपके लिए एक चौंकाने वाली खबर है. हाल ही में इकॉनोमिक टाइम्स द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार Data Broker कम्पनियां आपकी निजी जानकारी जैसे कि आपका फोन नम्बर, इमेल आईडी, आपका एड्रेस, मैरिटल स्टेटस, आपकी उम्र, हाइट, वजन, और यहाँ तक कि Credit Card और Debit Card जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां और आपके लीगल रिकॉर्ड जैसे कि कोई कोर्ट केस, दीवालिया होना, प्रॉपर्टी, टैक्स इनफार्मेशन, वोटिंग, राजनितिक रुझान आदि भी 1 रुपए से भी कम दाम में बेच रही हैं.

कैसे काम करती हैं Data Broker कम्पनियां

आपने कई बार यह नोटिस किया होगा कि आपके मेलबाक्स में या आपके फोन पर जो SMS आते हैं उनमें न सिर्फ आपका नाम लिखा होता है, बल्कि उन्हीं प्रोडक्ट्स या सर्विसेस के ऑफ़र होते हैं जिनके बारे में आप सोशल मीडिया पर जिक्र कर चुके हैं, या उससे सम्बंधित कोई purchase कर चुके हैं. यही है Targeted Marketing का कमाल. डाटा ब्रोकर्स आपकी निजी जानकारी को कुछ इस तरह से मैनेज करती हैं कि आपको वही ऑफ़र या advertisement दिखे जिसमें आपकी दिलचस्पी हो या आपके द्वारा विज्ञापन में दिए गए प्रोडक्ट खरीदने की सम्भावना हो.

जब आप Online Shopping करते हैं, नई इमेल आईडी बनाते हैं या किसी सोशल साईट पर अपना अकाउंट बनाते हैं तो आपसे आपका नाम, पता, फोन नंबर, जेंडर और अन्य जानकारियां देने के लिए कहा जाता है. Data Brokers इन महत्वपूर्ण जानकारियों को वहां से लीक करके एक Database में इकठ्ठा कर लेती हैं. इसके अलावा सोशल मीडिया साइट्स से भी डेटा उठाया जाता है जैसे ट्वीट्स, पर्सनल फोटोज, लाइक स्टेटस आदि जो यूजर बिहेवियर समझने के काम में आता है. बाद में यह डाटा अन्य मार्केटिंग कम्पनियों के रास्ते insurance, कार ट्रेडिंग, क्रेडिट कार्ड ऑफर्स, बैंक, हॉस्पिटल इत्यादि को बेच दिया जाता है. डाटा खरीदने वाली कम्पनी फिर उस जानकारी को Targeted Marketing के लिए इस्तेमाल करती हैं.

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Data Broker कम्पनियों के द्वारा आपका जो डाटा कलेक्ट किया जाता है उसमे कई तरह की जानकारियां होती हैं जैसे कि:

  • User Identity: इसमें नाम, आपकी current location, घर का पता, ईमेल आईडी, फोन नंबर आदि शामिल होते हैं
  • Sensitive Information: इसमें आधारकार्ड नंबर, सोशल सिक्योरिटी नंबर, ड्राइवर लाइसेंस, बैंक डिटेल्स आदि शेयर होती हैं
  • Demographic Data: इसमें आपकी उम्र, हाइट, वजन, आपके द्वारा बोली जाने वाली भाषा, आपका व्यवसाय, आपके इंट्रेस्ट (पसंद-नापसंद), जेंडर आदि सारी जानकारी शेयर होती है
  • Legal and Public Record: इस डाटा में आपके लीगल रिकॉर्ड जैसे कि कोई कोर्ट केस, दीवालिया होना, प्रॉपर्टी, टैक्स इनफार्मेशन, वोटिंग, राजनितिक रुझान आदि की जानकारी होती है
  • Social Media Statastics: कितने Facebook फ्रेंड्स हैं, कितनी ट्वीट हैं, किस तरह के हैशटैग इस्तेमाल किए जाते हैं आदि
  • Property and Loan: किस तरह का एरिया है, कैसा मकान है, रेंट कितना है, कार लीज कितनी है, ईएमआई कितनी है
  • Pesonal Interests: किस तरह के कपड़े ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स पर देखते हैं, किन अभिनेताओं की फ़िल्में पसंद हैं, किन सिंगर्स के गाने सुनते हैं, YouTube पर कैसे वीडियो देखे जाते हैं, कैसी साइट्स सर्फ की जाती हैं
  • Automobile and Travel Data: कौन सी गाड़ी चलाते है, कहां की टिकट बुक करवाई है, कहां जाने के लिए सर्च किया है, कौन सी फ्लाइट सर्च की गई है, कौन सी कार या बाइक में दिलचस्पी है आदि की जानकारी
  • Shopping, Health and Lifestyle: ऑनलाइन क्या सामान खरीदा गया, कितनी बार shopping साइट्स देखी गईं, सेहत के लिए क्या सर्च किया गया, आपका लाइफस्टाइल कैसा है आदि

हैरत की बात तो यह है कि मात्र 10 से 15 हजार रूपए में 1 लाख लोगों की निजी जानकारी आप इन Data Broker कम्पनियों से खरीद सकते हैं. चूँकि भारतीय IT लॉ में इसके लिए कोई खास नियम नहीं है इसलिए कोई भी बिना आपकी पर्सनल जिंदगी में झांक सकता है.

Facebook और Google भी करते हैं आपके निजी डाटा का इस्तेमाल

क्या कभी आपने सोचा है कि गूगल, फेसबुक, WhatsApp जैसी जो सोशल मीडिया और search engine services आपको फ्री में मिलती हैं फिर भी ये कंपनियां करोड़ों कैसे कमाती हैं? Google हो या फेसबुक दोनों के Revenue का बेस मॉडल ads और यूजर की जानकारी होती है. गूगल में आपकी एक Search Query भले ही आपके लिए काम की हो या ना हो, लेकिन कंपनियों के लिए बड़े काम की होती है. आप जिस भी विषय में search करेंगे, भविष्य में गूगल उन्हीं से जुड़ी एड्स दिखाता है. ऐसा ही फेसबुक और वॉट्सएप के केस में भी होता है.

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