कौन होगा दलाई लामा का अगला उत्तराधिकारी?

उत्तराधिकारी का चुनाव किसी वंश परम्परा, वसीयत या वोटिंग सिस्टम के बजाय पुनर्जन्म से सम्बंधित संकेतों के आधार पर होता है। दिवंगत दलाई लामा द्वारा छोड़े गए संकेतों के आधार पर वरिष्ठ बौद्ध भिक्षु नए धर्मगुरु की तलाश शुरू करते हैं।

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शांति का नोबेल पुरस्कार जीतने वाले तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा की अरुणाचल प्रदेश यात्रा को लेकर चीन ने कड़ा ऐतराज जताया है और एक बार फिर से उनके उत्तराधिकार को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। बौद्ध धर्म में Dalai Lama को सर्वोच्च नेतृत्व माना जाता है। चौदहवें दलाई लामा Tenzin Gyatso को तिब्बत में बौधिसत्व और राष्ट्राध्यक्ष के तौर बेहद सम्मानित दर्जा दिया जाता है।

गौरतलब है कि चीन ने वर्षों पहले Gyaincain Norbu को पंचेन लामा घोषित कर दिया था। पंचेन लामा सर्वोच्च पद दलाई लामा से एक पद नीचे होता है। दलाई लामा ने चीन द्वारा Norbu को उनका उत्तराधिकारी घोषित करने को मूर्खतापूर्ण बताते हुए कहा कि इस निर्णय में तिब्बत की जनभावना की उपेक्षा की गई है। दलाई लामा ने कहा कि उन्होंने 1969 में तिब्बत के नागरिकों को यह अधिकार दिया था कि वे यह तय करें कि यदि दलाई लामा का पद प्रासंगिक है तो वे इसे रख सकते हैं अन्यथा इस परम्परा को समाप्त कर सकते हैं।

उत्तराधिकार के प्रश्न पर दलाई लामा ने कहा कि कोई नहीं जानता कि अगला दलाई लामा कौन है और कहां पैदा होगा। वरिष्ठ भिक्षुओं को दलाई लामा की मृत्यु के बाद जिस किशोर में दलाई लामा के पुनर्जन्म के संकेत मिलते हैं उसे ही अगला दलाई लामा चुन लिया जाता है, लेकिन अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं हैं। उन्होंने अगले दलाई लामा के किसी महिला के बनने की संभावना से भी इनकार नहीं किया है।

कौन हैं दलाई लामा

दलाई लामा शब्द मंगोलिया के ‘दलाई’ और तिब्बत के ‘लामा’ से मिलकर बना है जिसका शाब्दिक अर्थ है ज्ञान का महासागर। तेनजिन ग्यात्सो एक संन्‍यासी हैं और वर्तमान में 14वें दलाई लामा हैं जो तिब्बत की निर्वासित सरकार के मुखिया और सर्वोच्च धर्मगुरु हैं। उन्‍हें बोधिसत्‍व और तिब्‍बत का संरक्षक माना जाता है। बौद्ध धर्म में बोद्धिसत्‍व वे होते हैं जिन्होंने अपने निर्वाण को टाल दिया हो और जो मानवता की सेवा के लिए पुनर्जन्म लेने का निश्‍चय लेते हैं।

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तेनजिन ग्यात्सो ने शांति और स्वायतता कायम करने के लिए माओ जेडांग और डेंग जियोपिंग जैसे बड़े चीनी नेताओं से मिलकर अमन की बहाली कर रास्ता तैयार करने की कोशिश की पर 1949 में चीन दवारा ल्हासा में तिब्बती राष्ट्रीय आन्दोलन को बेरहमी से कुचले जाने के बाद निर्वासन में चले गए। फिल्हाल वे भारत के धर्मशाला शहर में रहकर तिब्बत की निर्वासित सरकार को चला रहे हैं और वहीं से तिब्बत का केन्द्रीय प्रशासन सँभालते हैं। तिब्बत की आजादी के संघर्ष को हमेशा अहिंसात्मक तरीके से चलाने के लिए वर्ष 1989 में उन्हें शांति के क्षेत्र में नोबल पुरुस्कार से सम्मानित किया गया।

कैसे चुना जाता है Dalai Lama का उत्तराधिकारी

Selection Process of Dalai Lama’s Successor: दलाई लामा के उत्तराधिकारी की खोज उनकी मृत्यु के बाद शुरू होती है। उत्तराधिकारी का चुनाव किसी वंश परम्परा, वसीयत या वोटिंग सिस्टम के बजाय पुनर्जन्म से सम्बंधित संकेतों के आधार पर होता है। दिवंगत दलाई लामा द्वारा छोड़े गए संकेतों के आधार पर वरिष्ठ बौद्ध भिक्षु नए धर्मगुरु की तलाश शुरू करते हैं। इन संकेतों की मदद से ऐसे बच्चों की एक लिस्ट तैयार की जाती है जो दलाई लामा की मृत्यु के बाद पैदा हुए हों और उनमें पुनर्जन्म के कोई गुण पाए गए हों।

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दिलचस्प है तेनजिन ग्यात्सो के Dalai Lama बनने की कहानी: 1933 में 13वें दलाई लामा Thubten Gyatso की मौत के बाद नए दलाई लामा की खोज शुरू हुई। संकेतों का अध्ययन करते समय यह देखा गया कि दिवंगत दलाई लामा का शरीर दक्षिण दिशा से मुड़कर कुछ ही दिन में पूर्व दिशा की ओर आ गया। बताया जाता है कि शव की दिशा में कुछ अलग तरह के बादल मंडराते देखे गए और उसके सामने बने महल के खंबे पर सितारे के आकार की फंफूद भी उग आई।

उत्तराधिकारी की खोज में जुटे तत्कालीन कार्यवाहक ने कई दिन के ध्यान और पूजा के बाद पवित्र झील में कुछ अक्षरों की आकृतियां, हरे गोमेज, सुनहरी छत वाला एक मठ और मूंगिया रंग की एक छत वाला घर देखा। इसके साल भर बाद ल्हासा से पूर्व दिशा में गए भिक्षुओं ने आम्ददो प्रांत में एक मठ के पास मूंगिया छत वाले घर में रहने वाले एक किसान के बच्चे को खोज लिया। इस बच्चे ने 13वें दलाई लामा के कई सहयोगियों, मालाओं, छड़ी और दूसरी चीजों को आसानी से पहचान लिया और इस तरह किसान के घर में जन्मा तेनजिंग तिब्बत के 14वें सर्वोच्च गुरु के रूप में दलाई लामा के पद पर आसीन हुआ।

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