हर चार में से 1 बच्चा है डिप्रेशन का शिकार : WHO रिपोर्ट

पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया की बात करें तो 8.6 करोड़ लोग डिप्रेशन की चपेट में हैं। WHO ने बताया कि दक्षिण पूर्व एशिया के 10 देशों में से भारत में सबसे ज्यादा आत्महत्या की जाती है।

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आज दुनियाभर में वर्ल्ड हेल्थ डे मनाया जा रहा है और इस बार संयुक्त राष्ट्र ने विश्व स्वास्थ्य दिवस पर ‘अवसाद’ विषय पर फोकस किया है। इस मौके पर World Health Organization ने एक रिपोर्ट जारी की है। इसके मुताबिक भारत में 13 से 15 साल की उम्र का हर 4 में से 1 बच्चा Depression यानि अवसाद का शिकार है। इसी तरह अन्य आंकड़ो पर यदि गौर करें तो स्वास्थ्य सुविधाओं और फिटनेस के मामले में भारत की स्थिति चिंताजनक है। पूरे विश्व में करीब 1 अरब लोग High Blood Pressure से पीड़ित हैं। भारत में हर 5 में से 1 व्यक्ति High Blood Pressure से पीड़ित हैं। यदि स्थिति यूँ ही रहती है तो 2025 तक High Blood Pressure के मरीजो की संख्या लगभग 21 करोड़ हो जाएगी।

क्यों मनाया जाता है World Health Day

7 अप्रैल 1948 को जेनेवा में  डब्‍ल्‍यूएचओ (WHO – World Health Organisation) की स्थापना की गयी थी और यह दिन हर वर्ष विश्व स्वास्थ्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। स्वास्थ्य दिवस मनाने का उद्देश्य लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बारे में जागरूक करना तथा दुनिया भर के लोगों के स्वास्थ्य के स्तर ऊंचा को उठाना है। WHO का मुख्य उद्देश्य लोगों को पोलियो,  एड्स और एचआईवी जैसी घातक बीमारियों से मुक्त करवाना, तंददुरुस्त रहन-सहन की आदत अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

भारत में क्यों बढ़ रहें हैं Depression के मामले

पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया की बात करें तो 8.6 करोड़ लोग डिप्रेशन की चपेट में हैं। WHO ने बताया कि दक्षिण पूर्व एशिया के 10 देशों में से भारत में सबसे ज्यादा आत्महत्या की जाती है। साल 2012 में भारत में 15 से 29 साल के उम्रवर्ग के प्रति 1 लाख व्यक्ति पर आत्महत्या दर 35.5 थी। World Health Organization की दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र की निदेशक पूनम खेत्रपाल सिंह का कहना है कि 15 से 29 वर्ष की उम्र के लोगों के बीच मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण आत्महत्या ही है।

Depression पर केंद्रित World Health Organization की Report बताती है कि 7% किशोर घरेलू हिंसा और पारिवारिक सदस्यों द्वारा डांट-डपट के शिकार पाए गए। उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों, शिक्षकों और अन्य लोगों की टिप्पणियों से आहत महसूस किया। रिपोर्ट कहती कि 25% किशोर ‘अवसादग्रस्त और उदास या निराश’ हैं जबकि 11% ज्यादातर समय अपने काम पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते। पारिवारिक झगड़े, अशांति, संबंध-विच्छेद, व आर्थिक परेशानी आदि वजहें भी डिप्रेशन का कारण न सकती हैं

क्या हैं Depression के लक्षण

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प्रत्येक व्यक्ति समय-समय पर सीमित अवधि के लिए उदासी का अनुभव करता है। लेकिन जब लंबे समय तक लगातार नकारात्मक सोच, दुखी मनोदशा या पसंदीदा गतिविधियों में भी दिलचस्पी न लेने जैसे लक्षण सामने आने लगें तो यह डिप्रेशन हो सकता है।

  • डिप्रेशन के लक्षणों की बात करें तो थकान महसूस होना, सामान्य नींद की प्रक्रिया में विघ्न, नींद न आना व सुबह जल्दी उठ जाना, किसी काम को धीरे-धीरे करना, भूख में कमी अपराध बोध होना, आत्मविश्वास में कमी और सुस्ती शामिल है।
  • असफलता संबंधी विचार, स्वयं को कोसना, शीघ्र निराश होना, असहयोग, निकम्मेपन के विचार, दुर्भाग्यपूर्ण कार्य के लिए स्वयं को जिम्मेदार ठहराना, भविष्य के लिए नकारात्मक व निराशावादी दृष्टिकोण
  • उत्तेजना या शारीरिक व्यग्रता, मादक पदार्थों का सेवन करना, एकाग्रता में कमी और खुदकुशी करने का ख्याल आना भी Depression के लक्षण हैं।

कैसें बचें डिप्रेशन से

डॉक्टर मरीज की काउंसलिंग करके रोग की वजह समझने का प्रयास करते हैं। इसके बाद आवश्यकता के अनुरूप 6-8 माह तक एंटीडिप्रेसेंट दवाएं देते हैं। दवाओं के साथ-साथ मनोचिकित्सा व व्यवहारिक चिकित्सा द्वारा रोगी की निराशाजनक सोच को बदलने का प्रयास किया जाता है। इस दौरान  मरीज को पारिवारिक सहयोग जरूरी होता है।अवसाद से गुजर रहे लोगों के लिए इससे उबरने के लिए नियमित तौर पर ऐसे व्यक्ति से बात करना जिनपर वे भरोसा करते हों या अपने प्रियजनों के संपर्क में रहना मददगार हो सकता है।

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खुद से प्यार करना बेहद जरूरी: अवसाद की स्थिति में आप अकसर खुद से प्यार करना भूल जाते हैं। अगर आप खुद से प्यार नहीं करेंगे तो आप इस समस्या से कभी बाहर निकल पाएंगे। यदि आप खुद की देखभाल नहीं करेंगे तो और कोई भी नहीं करेगा। हमारी भारतीय संस्कृति योग पर आधारित रही हैं और हमारे पूर्वजन नियमित व्यायाम तथा संतुलित आहार  लेकर अपने आप को स्वस्थ रखते थे।

असल में पश्चिमी सभ्यता से प्रभावित होकर हमने अपनी जीवनशैली को आलसमय बना लिया है। आज के दौर में जटिल एवं व्यस्त जीवन शैली के कारण लोगों को व्यायाम करने तथा अपने स्वास्थ्य की ओर ध्यान देने का वक्त नहीं है जिसकी वजह से शरीर बीमारियों का घर बनता जा रहा है। यदि आप खुद से प्यार करते हैं तो उठिए और आज से ही खुद पर ध्यान देना शुरू करें, अपने पसंदीदा कपड़े पहनें, म्यूजिक, पेंटिंग या जिस भी चीज से आपको ख़ुशी मिलती है वो काम करें, चेहरे पर कॉन्फिडेंस का भाव लाएं और देखिए कैसे डिप्रेशन आपकी जिंदगी से हवा हो जाता है।

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