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सावधान, सर्दियों में बढ़ सकता है कोलेस्ट्रॉल, रखें दिल का ख्याल

यूँ तो सर्दियों का मौसम डाइट के लिहाज से काफी फायदेमंद समझा जाता है क्योंकि सर्दियों के सीजन में आने वाले फल, सब्जियां और मेवे साल भर शरीर में इमुनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) बनाए रखते हैं, परन्तु हृदय रोगियों के लिए यह मौसम काफी तकलीफदेह हो सकता है। अमेरिका में हुई एक रिसर्च में यह पाया गया है कि सर्दियों के मौसम में न सिर्फ वजन तेजी से बढ़ता है बल्कि Cholesterol का स्तर भी काफी तेजी से बढ़ सकता है।

डॉक्टर अंशुल सहगल के अनुसार शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए सर्दियों में शरीर को अधिक कैलोरीज चाहिए होती हैं और नैसर्गिक रूप से भूख बढ़ जाती है जबकि फिजिकल एक्टिविटी इन दिनों में न के बराबर होती है। सर्दियों में दिन छोटे होने से वर्किंग आवर्स कम हो जाते हैं और शरीर पूरी तरह से डाइट में मिली कैलोरीज को खपा नहीं पाता है। गर्मियों में लोग जहाँ फाइबर-रिच डाइट वहीं सर्दियों में गाजरपाक, पिन्नी आदि वसायुक्त खाद्य पदार्थो को अपनी डाइट में शामिल कर लेते हैं, यह लाइफस्टाइल भी सर्दियों में Cholesterol बढ़ने की एक प्रमुख वजह है। यदि आप हृदय रोगी नहीं भी हैं तो भी कोलेस्ट्रॉल नियमित रूप से चेक करवाते रहना चाहिए।

इसी तरह सर्दियों के मौसम में ब्लड लिपिड स्तर में 5mg तक का इजाफा हो सकता है। तापमान में गिरावट के साथ साथ हार्ट आर्टरीज में प्रेशर बढ़ जाता है जोकि खून की सप्लाई प्रभावित करने के साथ-साथ हार्ट तक ऑक्सीजन पहुँचाने की क्षमता को भी कम कर देता है। इसलिए सर्दियों के मौसम में दिल का खास ख्याल रखने की जरूरत है।

यूँ रखें सर्दियों में दिल का ख्याल

  • सर्दियों में मोटापा बढ़ने का एक कारण यह भी है कि लोग शारीरिक वर्जिश कम कर देते हैं। सर्दियों में हृदय-रोगियों को ठंड में न निकलने की हिदायत दी जाती है, ऐसे में शारीरिक श्रम न करने से कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। सर्दियों के मौसम के दौरान सैर करना न छोड़ें परन्तु सैर का समय जरूर बदल दें। धूप निकलने या धुंध का मौसम खुलने के बाद ही सैर करने जाएँ। यह हमेशा ध्यान रखें की सीधे चेस्ट पर हवा न लगे, जब सैर के लिए निकलें गले में मफलर बांध कर ही निकलें।
  • स्टडीज में यह पाया गया कि सर्दियों के मौसम में ‘बैड’ LDL कोलेस्ट्रॉल की मात्रा 1.7 से 3.5 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। इसलिए जहाँ तक हो सके चिकनाई व वसायुक्त भोजन का परहेज रखें। एक आम भ्रम है कि रिफाइंड आयल दिल के लिए अच्छा होता है, जबकि कई स्टडीज में इसके दुष्प्रभाव पाए गए हैं। रिफाइंड आयल और मक्खन की तुलना में देसी घी सेहत के लिए अधिक फायदेमंद होता है, इसलिए भोजन पकाते वक़्त लो-कोलेस्ट्रॉल घी का प्रयोग करना हितकर है।
  • रोजाना 5 से 6 गिलास पानी जरुर पिएं। शरीर के टोक्सिन बाहर निकालने और सामान्य तापमान बनाए रखने के लिए उचित मात्रा में पानी लेना अत्यंत आवश्यक है। नमक का सेवन कम से कम करें।
  • यदि आप हृदय-रोगी हैं और आपकी दवाई चल रही है तो किसी भी तरह का संक्रमण होने पर जनरल फिजिशियन की बताई दवाई लेने से पहले अपने हार्ट-स्पेशलिस्ट डॉक्टर की राय जरुर लें। सिर दर्द व कॉमन फ्लू की दवाई भी अपनी मर्जी से न लें। सीने में दर्द होने या अत्याधिक खांसी होने की स्थिति में तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें।
  • यदि रोजाना 15 से 20 मिनट तक शारीरिक श्रम करते हैं तो बादाम, अखरोट व सूखे मेवे लेने फायदेमंद हो सकता है।

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