वर्ल्ड अर्थ डे: पेड़ों का काटना नहीं रुका तो भुगतने होंगे गंभीर परिणाम

United Nations Food And Agriculture Organisation के मुताबिक 18 मिलियन एकड़ जंगल हर साल काटे जाते हैं।

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World Earth day यानि एक ऐसा दिन जब हम सब मिलकर अपने ग्रह को सुरक्षित रखने का प्रण लेते हैं। International Mother Earth Day 22 अप्रैल को मनाया जाता है। अमेरिका में इसे वृक्ष दिवस के रूप में मनाया जाता है। 2017 के Earth Day की थीम ‘Environmental and Climate Literacy’ है। इस दिवस को मनाने की शुरुआत अमेरिकी सीनेटर जेराल्ड़ नेलसन ने 22 अप्रैल 1970 से की थी।

Theme of World Earth Day 2107 is Environmental and Climate Literacy – अभिप्राय यह कि जन समुदाय के बीच हमारे बदलते हुए वातावरण और जलवायु के प्रति जागरूकता पैदा करना। कैसे यह बदलता हुआ जलवायु हमारे लिए हानिकारक है और इस से कैसे बचा जा सके।

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World Earth day को मनाने की जरूरत क्यों महसूस हुई: बढता हुआ तापमान, ओजोन परत में ब्लैक होल जिस वजह से ग्रीन हाउस इफेक्ट का बढना, वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, वाहनों और औद्योगिक क्षेत्रों से निकलता हुआ धुंआं, क्लोरो-फ्लोरो कार्बनज और भी बहुत से कारक ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेवार हैं। इन सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए धरती की सुरक्षा हेतु 1970 में पहली बार यह दिन मनाया गया और उसके बाद से लगभग 192 देशों ने इस दिवस को विश्व स्तर पर मनाने का संकल्प लिया।

Deforestation: अभी ना जागे तो भुगतने होंगे गंभीर परिणाम

आज के समय में प्रदूषण,ग्रीन हाउस इफैक्ट जैसी परेशानियाँ deforestation की वजह से हो रही हैं। Deforestation आज के समय की बहुत बड़ी समस्या है जिस से पृथ्वी को काफी हानि पहुँच रही है। Deforestation का अर्थ है जंगलों से पेड़ों को जलाना या काटना। बढ़ती हुई जनसंख्या के साथ ईंधन,लकड़ी आदि की जरूरतें बढ़ी है जिन की वजह से पेड़ काटे जा रहे हैं।जितनी संख्या में पेड़ काटे जा रहे हैं उतनी संख्या में लगाए नहीं जा रहे।

Deforestation का मुख्य कारण है जनसँख्या का बढ़ना तथा लोगों की आधुनिक जरूरतों का बढ़ना। अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग भी खाना पकाने के लिए लकड़ी क लिए जंगलों पर निर्भर करते हैं। दिनों दिन बढ़ती जनसँख्या के कारण कृषि,उद्योग आदि उद्देश्यों के लिए भूमि की आवश्यकता बढ़ती जा रही है। कृषि औजार अभी भी बड़े पैमाने पर लकड़ी से बनते हैं।इन सब कारणों की वजह से पेड़ों की संख्या काम होती जा रही है।

Deforestation के प्रभाव: वनों की कटाई का बहुत बुरा असर पृथ्वी पर हो रहा है। वनों की कटाई के कारण लगातार बाढ़ का खतरा बना रहता है। लगातार वनों की कटाई से जलवायु, पर्यावरण पर बहुत ही नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है जैसे पशु-पक्षियों के प्राकृतिक आश्रयों का नुकसान, पर्यावरण में बदलाव, ग्लोबल वार्मिंग।

इसके प्रभाव से बहुत सारे स्वास्थ्य विकार और ख़ास तौर से फेफड़े और सांस सम्बन्धी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। पृथ्वी का 30% हिस्सा जंगलो से भरा हुआ है। 13,000 स्क्वेयर जंगल हर साल काटे या जलाए जाते हैं। 20% ग्रीन हाउस का प्रभाव deforestation की वजह से होता है।

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United Nations Food And Agriculture Organisation के मुताबिक 18 मिलियन एकड़ जंगल हर साल काटे जाते हैं। साल 2000 से 2012 के बीच 2.3मिलियन स्क्वेयर किलोमीटर जंगल काटे गए हैं। 2014 में 5012 स्क्वेयर किलोमीटर, 2015 में 6207 स्क्वेयर किलोमीटर, 2016 में 7982 स्क्वेयर किलोमीटर के जंगलो का नुकसान हुआ है।

Deforestation को कैसे रोके: Deforestation को रोकने के लिए हमें एक साथ हो कर कोई कदम उठाना चाहिए।कागजों को बर्बाद नहीं करना चाहिए। पेड़ काटने की जरुरत को कम करने के लिए कागज के वस्तुओं के हमें दोबारा प्रयोग व पुनर्चकरण के बारे में सोचना चाहिए। इसके लिए जनसँख्या पर नियंत्रण करना चाहिए।जब कभी भी कोई पेड़ काटा जाए तो उसकी जगह पर कोई दूसरा पेड़ लगाना चाहिये। अधिक से अधिक पेड़ लगाने से ही deforestation को रोका जा सकता है।

(With inputs from Gunjan Bhutani and Rupika Kausal)

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